शनिवार, 10 अप्रैल 2010

खुशबु से वन महकता है

ब्लाग पर पहली बार लिख रहा हुँ, आपका आशीर्वाद चाहता हुँ,

देखता हूँ सूरज रोज चमकता है
किरणों के संग रोज झलकता है.

चमकता है मेरे माथे पर रोज
यूँ ही तिल तिल कर सरकता है

कभी बन जाता है आतंकवादी
नित आग के गोले सा बरसता है

चन्दन वन में भी शीतलता नहीं
सारा वुजूद दावानल सा दहकता है

वन में कुछ तितलियाँ है फूलों पर
जिसकी खुशबु से वन महकता है.

18 टिप्‍पणियां:

  1. अरे वाह !
    अब बने तेंदूसार के लउठी भंजाही .....
    ब्‍लॉगजगत म ठेठवार बडे भाई के अवतार के सुवागत हे.

    उत्तर देंहटाएं
  2. बबला भाई मउका-बेमउका लउठी म हुदरे बर आवत रहिबे, बने लागिस आपला इंहा देख के.

    उत्तर देंहटाएं
  3. ...बहुत सुन्दर... सुस्वागतम ... इन्ट्री धमाकेदार हुई है!!!

    उत्तर देंहटाएं
  4. वाह, पहली ही बार -सुन्दर गज़ल

    उत्तर देंहटाएं
  5. अच्छी प्रस्तुति। बधाई। ब्लॉगजगत में स्वागत।

    उत्तर देंहटाएं
  6. ब्लॉगजगत में स्वागत...
    .
    .
    .
    ...बहुत सुन्दर

    उत्तर देंहटाएं
  7. kyaa baat hai, shandar entry....

    rahte hain gorakhpur me, aur दिवाली मे तेंदु का लौठी तेल पिला के भांजने और दोहा पारने मे बड़ा मजा आता है, wakai sarahniya bat...chaliye vahan rah kar bhi aai thethwar aur Gauntiya ko nahi bhule hai, bahut badhiya, shubhkamnao ke sath swagat hai

    उत्तर देंहटाएं
  8. सुस्वागतम ,-सुन्दर गज़ल.....aapki topi to mere topi se bhi jyaada kamaal ki hai........jaasus thahare khud our mujhe jaasus kahate hain? chaliye koi baat nahi hamaari jaasusi samaaj ke kalyan ke liye hai......,aapka language kafi achchaa hai.

    उत्तर देंहटाएं
  9. ब्लागजगत में आपका स्वागत है.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  10. वाह!! आये और छाये:


    वन में कुछ तितलियाँ है फूलों पर
    जिसकी खुशबु से वन महकता है.

    बहुत खूब!!

    उत्तर देंहटाएं
  11. Kavita to achhi hai hi...apki tippani ke neeche likhi baat bhi mast hai...\
    http://dilkikalam-dileep.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  12. वन में कुछ तितलियाँ है फूलों पर
    जिसकी खुशबु से वन महकता है

    सुन्दर भावाभिव्यक्ति

    शुक्रिया

    उत्तर देंहटाएं
  13. दिल खोल कर टिप्पणी करें
    लौटाउंगा आपको उम्मीद से ज्यादा
    ये है भीम पुत्र घटोत्कच का वादा

    अगर ये लाइन यहाँ फिर से दिखी तो मै कमेन्ट करने में खुद को असहाय पाउंगा

    उत्तर देंहटाएं
  14. इस नए चिट्ठे के साथ हिंदी ब्‍लॉग जगत में आपका स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

    उत्तर देंहटाएं
  15. कली बेंच देगें चमन बेंच देगें,

    धरा बेंच देगें गगन बेंच देगें,

    कलम के पुजारी अगर सो गये तो

    ये धन के पुजारी वतन बेंच देगें।

    हिंदी चिट्ठाकारी की सरस और रहस्यमई दुनिया में राज-समाज और जन की आवाज "जनोक्ति "आपके इस सुन्दर चिट्ठे का स्वागत करता है . . चिट्ठे की सार्थकता को बनाये रखें . नीचे लिंक दिए गये हैं . http://www.janokti.com/ , साथ हीं जनोक्ति द्वारा संचालित एग्रीगेटर " ब्लॉग समाचार " http://janokti.feedcluster.com/ से भी अपने ब्लॉग को अवश्य जोड़ें .

    उत्तर देंहटाएं

दिल खोल कर टिप्पणी करें
लौटाउंगा आपको उम्मीद से ज्यादा
ये है भीम पुत्र घटोत्कच्छ का वादा